दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी पर फिर से अकाली दल ने किया कब्जा, शिरोमणि अकाली दल दिल्ली ने किया विरोध !


नई  दिल्ली, 23 जनवरी : शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने दावा किया दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के आतंरिक चुनाव में शनिवार को अकाली दल बादल एवं भाजपा ने मिलकर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में लोकतंत्र का कत्ल किया। गुरु साहिब की मौजूदगी में अकाली दल ने चिटठी लिखकर गुरु घर में पुलिस बुलाई जबकि इतिहास में आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ।

ये भी पढ़ें : DSGMC दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी में करोडों रूपये का घोटाला, लाखों रूपये गायब



ये भी पढ़ें :  तरविंदर मारवाह ने दिया सरना दल को खुला समर्थन


 सरना ने कहा कि सत्तापक्ष ने पुलिस की बंदूक की नोक पर विपक्ष का गला घोंट दिया और हाउस से संपूर्ण विपक्ष को बाहर निकाल दिया। यह सरासर अन्याय और लोकतंत्र का मजाक है। सरना ने कहा कि जब पुलिस विपक्ष को बाहर निकाल रही थी तब अकाली दल के नेता दिल्ली पुलिस जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।आखिरकार आधी रात को वही हुआ, जिसे अकाली दल एंव भाजपा के तथाकथित नेता चाह रहे थे। विपक्ष को बाहर निकालकर रिजल्ट घोषित कर दिया।


  

 ये भी पढ़ें :    सरना ने डीएसजीएमसी में फाइनेंशियल रिसीवर नियुक्त करने की मांग

 ये भी पढ़ें :   डीएसजीएमसी चुनाव 2021:दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों ने की चुनाव की तैयारी तेज : जत्थेदार बचन सिंह

सरना ने कहा कि विवाद की असली जड अस्थायी सभापति गुरदेव सिंह हैं, जिनकी बदौलत बवाल खडा हुआ और दिनभर स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। मीटिंग की शुरुआत के बाद जब अस्थायी सभापति के चुनाव का समय आया तो संयुक्त विपक्ष की तरफ से एसजीपीसी के अध्यक्ष एवं शिरोमणि कमेटी के प्रतिनिधि हरजिंदर सिंह धामी का नाम आगे बढाया गया, जिसका अकाली दल बादल के लोगों ने विरोध किया।

 ये भी पढ़ें :  DSGMC के प्रधान मनजिंदर सिंह सिरसा धार्मिक परीक्षा में हुए फेल, सिख कौम से मांगें माफी : परमजीत सिंह सरना

 जवाब में उन्होंने गुरदेव सिंह का नाम आगे बढ़ा दिया। धामी ने अपनी ही पार्टी के लोगों का विरोध सामने देखकर अस्थायी सभापति बनने की अपनी सहमति नहीं दी । जिस वजह से गुरदेव सिंह अस्थायी सभापति बन गए। सभापति बनते ही गुरदेव सिंह ने ऐलान किया कि अध्यक्ष का चुनाव हाथ खड़े करवा कर होगा।

 ये भी पढ़ें :  सभी स्कूलों और कॉलेजों का किया बुरा हाल : अनूप सिंह



 इसका पूर्व कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके सहित उनकी पार्टी ने तीखा विरोध किया। साथ ही गुरुद्वारा चुनाव निदेशक नरिंदर सिंह को चुनाव नियम गुरदेव सिंह को पढ़वाने की अपील की। इसके बाद निदेशक ने गुरदेव सिंह को चुनाव कराने की पूरे नियम बताए। साथ ही यह भी बताया कि मतदान की प्रक्रिया गुप्त मतदान के जरिये होती है।

ये भी पढ़ें :  DSGMC दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी में चल रहे घोटालों का भंडाफोड़


 इसके बाद गुरदेव सिंह ने अध्यक्ष पद के लिए कमेटी सदस्यों से नाम मांगा। सत्तापक्ष की तरफ से हरमीत सिंह कालका के नाम का प्रस्ताव आया। जबकि संयुक्त विपक्ष की तरफ से परमजीत सिंह सरना का नाम सामने आया। दोनों उम्मीदवारों के चुनाव लडऩे की सहमति देने के बाद मतदान प्रकिया शुरू हुई। लेकिन इस बीच कमेटी सदस्य सुखबीर सिंह कालरा ने अपने हाथ में ली हुई पर्ची को साथ के सदस्य को दिखा दिया, वो किसको वोट डालने जा रहे हैं।

ये भी पढ़ें :    गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में फिल्मी गाने चलने पर शिरोमणि अकाली दल और पंथक अकाली लहर ने किया विरोध प्रदर्शन

 इसी पर उन्होंने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि कालरा का वोट अवैध घोषित किया जाए। यहीं से विवाद शुरू हो गया। इसी बहसबाजी के बीच एक और सदस्य ने वोट डाल दिया। 51 में से 3 वोट डलने के बाद चुनाव प्रक्रिया रुक गई। कई घंटे तक चले गतिरोध के बाद भी नतीजा नहीं निकला। उनकी मांग रही  कि कालरा का वोट रदद करके मतदान करवाया जाए लेकिन अस्थायी सभापति गुरदेव सिंह का कहना है कि वे हाथ खड़े करवाकर ही मतदान करवाएंगे। इसकी वीडियों भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। 

0/Post a Comment/Comments