मुबारकपुर डबास: नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं इस गांव के लोग, राजनिवास तक करेंगे पदयात्रा

 

नई दिल्ली : किराड़ी विधानसभा क्षेत्र के गांव मुबारकपुर डबास (Mubarakpur Dabas) के प्रति इलाके के सांसद, विधायक एवं निगम पार्षद के साथ-साथ संबंधित विभागों के अधिकारियों के उपेक्षापूर्ण रवैये के विरोध में चौगामा विकास समिति ने गांव से राजनिवास तक पदयात्रा करने का ऐलान किया है और समिति ने उपराज्यपाल से मुलाकात नहीं होने तक राजनिवास पर धरना देेने का भी निर्णय लिया है। समिति के बैनर तले इलाके के निवासी चार अक्तूबर को मुबारिकपुर डबास से पदयात्रा शुरू करेंगे और पांच अक्तूबर को राजनिवास पर पदयात्रा का समापन करेंगे।


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◆ उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री तक कर चुके है शिकायत 

समिति के महासचिव विजेंद्र सिंह डबास ने बताया कि गांव मुबारिकपुर डबास में मूलभूत सुविधाएं लुप्त होती जा रही है और समस्याओं का अंबार लगता जा रहा है। गांव में हालात बद सेे बदतर हो चुके है, जबकि गांव की इस स्थिति से अनेक बार इलाके के जनप्रतिनिधियों व संबंधित विभागों के अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन वे गांव की सुध नहीं ले रहे है। इस संबंध में गत चार सितंबर, 2021 को प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, शहरी विकास मंत्री, मुख्य सचिव, डीडीए के उपाध्यक्ष, मंडलायुक्त, उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त, उत्तर पश्चिम जिला के जिलाधिकारी को मेल करके अवगत कराया था।


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◆ किसी भी अधिकारी ने नहीं ली गांव की सुध

 इसके बाद भी संबंधित विभागों के अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी है। किसी भी विभाग के अधिकारी ने गांव की सुध लेना मुनासिब समझा। इसके विरोध में समिति ने गांव मुबारिकपुर डबास से राजनिवास तक पदयात्रा करने का निर्णय लिया है। इलाके के निवासी चार अक्तूबर को पदयात्रा शुरू करेंगे और पांच अक्तूबर को राजनिवास पर पदयात्रा का समापन करेंगे।

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◆ सड़क की हालत इतनी खराब कि डीटीसी ने बदल दिया रूट

विजेंद्र सिंह डबास ने बताया कि गांव के चारों ओर ही नहीं, बल्कि मुख्य सड़क व गलियों में भी बारिश का पानी जमा है। गांव का आसपास के गांवों व कालोनियों से सड़क संपर्क टूट गया है। गांव में गंदे पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश गलियां व नालिया जर्जर हो चुकी है। गांव में स्थित नगर निगम स्कूल के सामने दो वर्ष से अधिक समय से सड़क टूटी पड़ी हुई हैै। इस कारण गांव में बसों का आवगमन बंद हो गया है और ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास की कालोनियों के निवासी दो साल सेेे अधिक समय से बस सेवा से वंचित है।


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◆ डाकघर, डिस्पेंसरी, लाइब्रेरी सालों से पडी है बंद

 गांव में वर्षों से पहले डाकघर खोला गया था, लेकिन पांच वर्ष से डाकघर बन्द है। गांव में वर्ष 1998 में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नगर निगम ने आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी खोली थी, मगर यह डिस्पेंसरी छह साल से बंद है। गांव में प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति नहीं आने के कारण ग्रामीणों को पूरे वर्ष पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है। गांव में दो साल से 72 घंटे के अन्तराल पर पेयजल आपूर्ति की जाती है। गांव में 23 वर्ष पहले दिल्ली सरकार की हिंदी अकादमी ने लाइब्रेरी खोली थी, लेकिन पिछले चार साल से लाइब्रेरी भी बंद है।

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◆ गांव होता जा रहा खंडर 

 गांव में दो पार्क बने हुए है, एक पार्क अभी तक किसी भी विभाग के अधीन नहीं किया गया है। इस कारण इस पार्क का रखरखाव नहीं हो रहा है, दोनों पार्कों में पानी भरा होने के कारण उनमें लगे पेड़-पौधे सूख गए है। दोनों पार्कों में ओपन जिम एवं झूले भी नहीं लगाए गए है, जबकि राजधानी के अधिकतर गांवों व कालोनियों के पार्कों में ओपन जिम व झूले लगा रखे है। गांव में ढाई दशक पहले बनाए गए बहुउद्देशीय सामुदायिक केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को कोई सुविधा नहीं दी गई है। इस कारण यह खंडर होता जा रहा है। राजधानी से गांव को जोड़ने वाला प्रमुख रोड नांगलोई-मदनपुर डबास रोड (वाया किराड़ी) खस्ता हालत में है।