मुबारकपुर डबास: मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जूझ रहा दिल्ली का मुबारकपुर डबास गांव

बाहरी दिल्लीसंजय बर्मन: शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले हमेशा ही तमाम तरह की सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। चाहे शिक्षा, अस्पताल, परिवहन आदि सुविधाएं हो। सभी तरह की सुविधाएं वहां सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है, लेकिन वहीं अगर ग्रामीण क्षेत्रों की बात करे तो यहां के हालात शहरी इलाकों से उलट पाएं जाते हैं। इसी क्रम में किराड़ी विधानसभा क्षेत्र स्थित मुबारकपुर डबास गांव भी हैं। जहां के हालात भी समय के साथ-साथ बद से बदतर हो गए हैं।

MCD नरेला वार्ड कमेटी की बैठक में सफाई व्यवस्था पर हुई चर्चा



MCD नरेला वार्ड कमेटी की बैठक में कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा


गंदे पानी की निकासी नहीं –

मुबारकपुर डबास गांव में नालियों के गंदे पानी की निकासी के लिए सुचारू व्यवस्था नहीं है। जिस वजह से नालियों का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर गलियों में ही जमा रहता है। जिससे गलियों में हमेशा बदबू की स्थिति बनी रहती है। गलियों से राहगीरों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। हमेशा गलियों में गंदा पानी जमा रहने की वजह से गली व नाले भी जर्जर होकर टूट चुके हैं। जिसे कई वर्षों से नए तौर पर बनाया भी नहीं गया है।


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मुख्य मार्ग बंद होने से सार्वजनिक परिवहन सेवा ठप्प –

साल 2019 के जुलाई माह से ही गांव के मुख्य सड़क पर दिल्ली जल बोर्ड व सिचांई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा कार्य होने की वजह से सड़क बंद है। जिसकी वजह से इस सड़क से लोगों की आवाजाही बंद हो गई है। साथ ही सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी ठप्प हो गई है। पहले ग्रामीण इसी सड़क पर बस पकड़ते थे, लेकिन अब उन्हें दूर जाकर बसें पकड़नी पड़ती है।


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पुस्तकालय भी बंद पड़ी है –

गांव में स्थित एकमात्र हिंदी अकादमी का पुस्तकालय भी साल 2017 के मार्च माह से बंद पड़ा है। इस पुस्तकालय के होने से गांव के विद्यार्थियों से लेकर बुजुर्ग वर्ग तक के लोग यहां आकर अपना ज्ञानार्जन करते थे। लेकिन पिछले चार साल से बंद पुस्तकालय को ग्रामीणों द्वारा खोलने की काफी कोशिशों के बाद भी पुस्तकालय नहीं खुल पाई।

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आयुर्वेदिक इलाज के लिए जाना पड़ता है दूर –

गांव में छह साल पहले उत्तरी दिल्ली नगर निगम की आयुर्वेदिक डिसपेंसरी होने की वजह से ग्रामीण पहले गांव में ही अपना आयुर्वेदिक इलाज करवाते थे। लेकिन साल 2015 में नगर निगम द्वारा इस डिसपेंसरी को छह किलोमिटर दूर हस्तांतरित करवा दिया गया। जिस वजह से ग्रामिणों को आयुर्वेदिक इलाज करवाने के लिए छह किलोमिटर दूर जाना पड़ता है।

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गांव के ही चौगामा विकास समिति के महासचिव विजेंद्र सिंह डबास का कहना है कि मैंने अपने स्तर पर इन सभी सुविधाओं के लिए सभी विभागों को कई बार पत्राचार तक किया। लेकिन अधिकारियों व क्षेत्रीय प्रतिनिधियों को इस गांव की कोई फिक्र नहीं है। जिस वजह से सुविधाओं के अभाव में गांव के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।