कोरोना संकट के बीच झूठे साबित हो रहे सरकारी दावे !

नई दिल्ली : बाहरी दिल्ली के नरेला के गौतम कॉलोनी निवासी एक बुर्जुग पिता ने कोरोना काल में 44 वर्षीय सतीश कुमार अपने बेटे को खो दिया जोकि  डीटीसी में चालक के रूप में पिछले 11 साल से परमानेंट तौर पर कार्यरत थे . 




 जानकारी के अनुसार सतीश कुमार ड्यूटी करते हुए 1 मई 2021 को कोरोना संक्रमित हुए और 13 मई 2021को उनकी अस्पताल में मौत हो गई। सतीश कुमार के  परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे एक लड़का और लड़की हैं अब पिता जिले सिंह अपने बेटे को कोरोना योद्धा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे है 







वहीं दुसरी ओर दिल्ली सरकार, अगर अपनी ड्यूटी निभाने के दौरान किसी कोरोना योद्धा की मौत हो जाती है तो सरकार ऐसे योद्धाओं के परिवार के साथ भी खड़े रहने के दावे करती है . 






 पिता जिले सिंह : दिल्ली सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली है जिस कारण उनका परिवार पूरी तरह से बिखर सा गया है और हमे घर खर्च करने में भी काफी परेशानियों का  सामना करना पड़ रहा है और घर में कोई कमाने वाला भी नहीं है।


   
    बेटा ड्यूटी करते हुए 1 मई 2021 को कोरोना संक्रमित हुआ था जिसको दिल्ली के  सभी अस्पताल ने भर्ती करने के लिए मना कर दिया था फिर बाद में  Civil Hospital, Gohana Road, Jind  में भर्ती करवाया गया जहां 13 मई 2021 को उनकी मौत हो गई। 


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