सरना ने सिख कत्लेआम के दोषियों को सजा दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया तेज करने की माँग की ।


 नई दिल्ली, (1 जून,2021) : ऑपरेशन ब्लूस्टार के 37 वर्ष गुजरने के बाद भी देश के काले अध्याय को संगत के सामने पेश नही किया गया। यह बाते शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कही।



पंथक नेता ने कहा कि ना तो आने वाली सरकारों ने, और नही श्री अकालतख्त साहिब के किसी जत्थेदार ने यह बाते देश के सामने रखी की आखिर ऑपरेशन ब्लूस्टार के पहले प्रकाश सिंह बादल ने उस समय के मुख्य नेताओ के साथ क्यों गुप्त बैठक रखी थी।


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 "ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले की उन महत्वपूर्ण बैठकों को इतना व्यापक रूप से क्यों छुपाया गया है?"  सरदार सरना ने आश्चर्य व्यक्त किया। 


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यह कोई हैरानी की बात नही है कि सिख कत्लेआम के बाद ही प्रकाश सिंह बादल का कद पंजाब के राजनीतिक मैदान में ऊँचा हुआ। बादल के आगे आने से ही सिख विरोधी ताकतों को नया बल मिला है। 

 

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"यह बात अब भी दुनिया को नही पता है की आखिर किसके इशारे पर मोगा कन्वेशन,1996 में पंथक मुद्दों को खत्म कर दिया गया ? "


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 "यह सवाल करने वाली बात है कि आखिर क्यों पंजाब की पंथक और राजनीतिक सभी शक्ति एक परिवार के हाथो में सिमट कर रह गयी है। एसजीपीसी /डीएसजीएमसी के प्रमुखों की नियुक्ति से लेकर सभी धर्मिक मुद्दों पर एक पंथ विरोधी पार्टी और परिवार का ही बोल-बाला चल रहा है। "


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 सरदार सरना ने गुरु ग्रंथ साहिब के बेअदबी और बरगाड़ी में निःसहाय सिखो के कत्लेआम के मुद्दे पर चल रही कानूनी प्रक्रिया पर भी निराशा जतायी। उन्होंने पंजाब सरकार से माँग किया कि फाइलों को दुबारा खोलकर जाँच को जल्द पूरा किया जाए। 


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 “पूरे सिख जगत को पता है की हमारे पीठ में छुरा भोंकने वाले कौन लोग है। हमारी कैप्टन अमरिंदर सिंह जी की सरकार से आग्रह है की कानूनी प्रक्रिया को लंबा खीचने के बजाय बेदबी के दोषियों की जल्द सजा दिलवाए। 1970 के दशक से लेकर अभी तक जिन्होंने सबसे ज्यादा सिख समुदाय का नुकशान किया है उनकी जवाबदेही तय होनी बनती है। "

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