किन्नरों का अंतिम संस्कार कैसे होता है?

   नई दिल्ली,(नरेन्द्र):  हमारे समाज में ऐसे भी लोग हैं जिनको  जन्म से ही अपने से अलग कर दिया जाता है और जिनको हमारे समाज में  सम्मान की नजरों से नहीं देखा जाता हैं  जिन्हें हम सभी किन्नर समुदाय। (थर्ड जेंडर )के नाम से जानते हैं.  इनके रीति-रिवाज और संस्कारों के बारे में तो शायद ये बात बहुत कम लोग ही जानेते होंगे कि जब किन्नरों की मौत होती है तो किन्नरों का अंतिम संस्कार कैसे होता है?

कहा जाता है कि किन्नरों की शव यात्रा दिन के वक्त नहीं बल्कि रात के वक्त निकाली जाती है. शव यात्रा को उठाने से पहले शव को जूते-चप्पलों से पीटा जाता है. समुदाय में किसी भी किन्नर की मौत के बाद पूरा समुदाय एक हफ्ते तक भूखा रहता है. हालांकि किन्नर समुदाय भी इस तरह की रस्मों से इंकार नहीं करता है।

वहीं दुसरी ओर किन्नर समाज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसी भी किन्नर की मौत के बाद ये लोग मातम नहीं मनाते हैं. इनकी मान्यता है कि मरने के बाद उस किन्नर को इस नर्क रूपी जीवन से छुटकारा मिल जाता है इसलिए मरने के बाद ये लोग खुशी मनाते हैं।

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